बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी के दीनदयाल हस्तकला संकुल में शनिवार से तीन दिवसीय ‘ओडिशा पर्व’ का आयोजन हो रहा है। भगवान शिव की नगरी में आयोजित इस उत्सव में ओडिशा की कला, संस्कृति, खान-पान, हस्तशिल्प और पर्यटन की झलक देखने को मिल रही है। कार्यक्रम उत्तर प्रदेश और ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को करीब लाने के साथ दोनों राज्यों के बीच पर्यटन सहयोग का मंच भी बन रहा है।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘ओडिशा पर्व’ सिर्फ सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच पर्यटन सहयोग के नए दौर की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को ओडिशा की समुद्री परंपरा, मंदिरों, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प और हथकरघे से जोड़ा जा सकता है। दोनों राज्य मिलकर नए पर्यटन सर्किट, प्रचार अभियान और बी2बी कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं।
जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य पर्यटकों को मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थानीय संस्कृति, खान-पान, कला, शिल्प और जीवनशैली का पूरा अनुभव देना है। उन्होंने बताया कि 2025 में उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड करीब 156 करोड़ पर्यटक पहुंचे, जबकि 2026 में जून तक 41 करोड़ से ज्यादा पर्यटक राज्य का दौरा कर चुके हैं। पर्यटन को रोजगार, निवेश और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने के साथ विजन 2047 से जोड़ा जा रहा है।
‘ओडिशा पर्व’ में ओडिसी, गोटीपुआ, संबलपुरी, घूमरा, ढेमसा और पाइका अखाड़ा जैसे पारंपरिक नृत्य और लोक कलाओं की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र हैं। वहीं, छेना पोड़ा और रसगुल्ला जैसे ओडिशा के पारंपरिक व्यंजन भी काशी के लोगों और पर्यटकों को राज्य के स्वाद से परिचित करा रहे हैं। मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह आयोजन ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करेगा और उत्तर प्रदेश-ओडिशा के बीच पर्यटन, संस्कृति और लोगों के आपसी संबंधों को नई ऊंचाई देगा।